कैसे उनको पाऊं आली--आशा भोसले का स्वर
आज सुर-सखी आशा भोसले की पचहत्तरवीं सालगिरह है । इसलिए कुछ ऐसा प्रस्तुत करने का मन था, जो आमतौर पर हम आशा जी की आवाज़ में नहीं सुनते ।
आशा जी और जयदेव ने बरसों पहले एक अलबम निकाला था । शायद सन 1971 या 1977 में । इसमें आशा जी ने कमाली, मीरा बाई, जयशंकर प्रसाद और महादेवी की रचनाओं को स्वर दिया था । आज के मौक़े के लिए पहले तो मुझे ये अलबम याद आया । फिर याद आया कि आशा भोसले और गुलाम अली के साझा अलबम 'मेराज-ए-ग़ज़ल' से कुछ पेश किया जाए । ख़ैर महादेवी की ये रचना मुझे बहुत प्रिय है ।
आईये आशा जी को पचहत्तर साल पूरे करने की बधाई देते हुए उनके कांचन-स्वर में ये गीत सुना जाए ।
बस इतना अर्ज़ करना चाहता हूं कि इसमें ठेठ जयदेव शैली का संगीत है । रिदम हो या स्ट्रिंग्स, मुरली की शांत तान भी इस गाने में पिरोई गई है । ऐसा संगीत केवल जयदेव ही दे सकते थे । जो जीवन भर अपनी शर्तों पर रहे और अपनी शर्तों पर काम किया ।
ये रही डाउनलोड कड़ी
लाइफलॉगर आपको संभवत: flv फाइल देगा, जिसके लिए कृपया खास प्लेयर डाउनलोड कीजिएगा ।
अब sms के ज़रिए पाईये ताज़ा पोस्ट की जानकारी