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Tuesday, December 25, 2007

गोरकी पतरकी रे--मो. रफ़ी के भोजपुरी और बांगला गीत--जन्‍मदिन पर विशेष

आज चौबीस दिसंबर है ।
मो. रफ़ी साहब का जन्‍मदिन । इस दिन को रफ़ी के चाहने वाले बड़े चाव ये याद रखते हैं ।


दिन भर की हड़बड़ी और भागमभाग के बीच भी रफ़ी साहब की याद में मैंने एक गाना रेडियोवाणी पर सुनवाने की ठान रखी थी । और वो है एक भोजपुरी गीत । सन 1979 में आई फिल्‍म बलम परदेसिया का ये गीत मुझे इंटरनेट खंगालने के बाद आखि़रकार मिल ही गया । इसे चित्रगुप्‍त ने स्‍वरबद्ध किया है ।

रफी साहब की ख़ासियत ये थी कि वो किसी भी भाषा का गाना बड़ी सहजता से गा लेते थे । उन्‍होंने भोजपुरी भी गाय, बांगला भी और अंग्रेज़ी भी । यहां तक कि दक्षिण की भाषाओं में भी उनके कुछ गीत हैं । मो. रफ़ी के चाहने वाले उनकी याद में एक वेबसाईट चलाते हैं जिस पर टिप्‍पणियों की तादाद देखकर आपको हैरत होगी । यहां सामग्री भी कमाल की है । मुझे निजी रूप से रफ़ी साहब के गाये भजन और कुछ नाज़ुक रूमानी गाने बेहद पसंद हैं । कुछ गाने यहां पेश हैं । आज रफ़ी साहब को याद करना उनके शैदाईयों के लिए एक रवायत भी है और ज़रूरत भी । रफ़ी की आवाज़ हमारी जिंदगी की खुशनसीबी है ।

पहले सुनिए--फिल्‍म बलम परदेसिया का ये गीत--गोरकी पतरकी रे ।

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जल्‍दी जल्‍दी चल रे कहारा सुरूज डूबे रे नदिया

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ये रहे रफ़ी साहब के गाये कुछ बांगला गीत ।

आज मोधुरो बंसरी बाजे ।।

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कोने चालबाजेर मुखे

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काजी नजरूल इस्‍लाम की रचना रफ़ी साहब की आवाज़ बोल हैं --आधो आधो बोल लाजे.......

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उम्‍मीद है कि रफ़ी साहब के इन गीतों को सुनकर आपकी आज की शाम संवर जायेगी । मैं तो आज रफ़ी साहब की आवाज़ में डूबकर एक दूसरी ही दुनिया में पहुंच गया हूं ।

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अब sms के ज़रिए पाईये ताज़ा पोस्‍ट की जानकारी

गोरकी पतरकी रे--मो. रफ़ी के भोजपुरी और बांगला गीत--जन्‍मदिन पर विशेष

आज चौबीस दिसंबर है ।
मो. रफ़ी साहब का जन्‍मदिन । इस दिन को रफ़ी के चाहने वाले बड़े चाव ये याद रखते हैं ।


दिन भर की हड़बड़ी और भागमभाग के बीच भी रफ़ी साहब की याद में मैंने एक गाना रेडियोवाणी पर सुनवाने की ठान रखी थी । और वो है एक भोजपुरी गीत । सन 1979 में आई फिल्‍म बलम परदेसिया का ये गीत मुझे इंटरनेट खंगालने के बाद आखि़रकार मिल ही गया । इसे चित्रगुप्‍त ने स्‍वरबद्ध किया है ।

रफी साहब की ख़ासियत ये थी कि वो किसी भी भाषा का गाना बड़ी सहजता से गा लेते थे । उन्‍होंने भोजपुरी भी गाय, बांगला भी और अंग्रेज़ी भी । यहां तक कि दक्षिण की भाषाओं में भी उनके कुछ गीत हैं । मो. रफ़ी के चाहने वाले उनकी याद में एक वेबसाईट चलाते हैं जिस पर टिप्‍पणियों की तादाद देखकर आपको हैरत होगी । यहां सामग्री भी कमाल की है । मुझे निजी रूप से रफ़ी साहब के गाये भजन और कुछ नाज़ुक रूमानी गाने बेहद पसंद हैं । कुछ गाने यहां पेश हैं । आज रफ़ी साहब को याद करना उनके शैदाईयों के लिए एक रवायत भी है और ज़रूरत भी । रफ़ी की आवाज़ हमारी जिंदगी की खुशनसीबी है ।

पहले सुनिए--फिल्‍म बलम परदेसिया का ये गीत--गोरकी पतरकी रे ।

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जल्‍दी जल्‍दी चल रे कहारा सुरूज डूबे रे नदिया

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ये रहे रफ़ी साहब के गाये कुछ बांगला गीत ।

आज मोधुरो बंसरी बाजे ।।

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काजी नजरूल इस्‍लाम की रचना रफ़ी साहब की आवाज़ बोल हैं --आधो आधो बोल लाजे.......

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उम्‍मीद है कि रफ़ी साहब के इन गीतों को सुनकर आपकी आज की शाम संवर जायेगी । मैं तो आज रफ़ी साहब की आवाज़ में डूबकर एक दूसरी ही दुनिया में पहुंच गया हूं ।

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Monday, July 30, 2007

कल मो. रफ़ी की पुण्‍यतिथि है, बताईये रफ़ी आपको क्‍यों प्रिय हैं


कल मो. रफी की पुण्‍यतिथि है ।
जब शोर और संगीत का फ़र्क़ मिटता जा रहा है, तो इस दिन हम अपने मेहबूब फ़नकार को सलाम करेंगे और ज़माने के चलन पर सोग़ मनायेंगे ।

31 जुलाई का दिन दो हस्तियों के लिए याद किया जाता है । एक मो0 रफी और दूसरे प्रेमचंद ।

दोनों को हमने याद भी रखा पर प्रकारांतर से भुला भी तो दिया है ।

मो0 रफी पर कल ‘रेडियोवाणी’ पर एक विशेष आयोजन किया जायेगा ।
‘ज्ञान’ जी क्‍या मैं आपसे प्रेमचंद पर लिखने का निवेदन कर सकता हूं ।

लेकिन फिलहाल कल तक आपको बताने हैं रफ़ी के अपने पसंदीदा गीत । नहीं
समीर भाई, ये गुज़ारिश मैं अपने नए पॉडकास्‍ट के लिए नहीं कर रहा । थोड़े दिनों के लिए पॉडकास्‍ट को विराम दिया जा रहा है । कुछ हफ्ते रूकियेगा पॉडकास्‍ट के लिए ।

दरअसल जब हमारा सामूहिक-ब्‍लॉग रेडियोनामा शुरू हो जायेगा तब इस तरह की चर्चाएं उस ब्‍लॉग पर ही की जायेंगी । लेकिन रफ़ी साहब के बहाने हम ये जानना चाहते हैं कि एक कालजयी कलाकार हमारी जिंदगी में किस क़दर दख़ल रखता है । हमारी जिंदगी के वो कौन से लम्‍हे होते हैं जो इनकी वजह से अनमोल बन जाते हैं ।

रफ़ी साहब ने आपकी जिंदगी के किन दिनों को यादगार बनाया है यही जानना चाहता हूं मैं । आपकी बातों को संपादित करके एक पूरी पोस्‍ट में प्रस्‍तुत करने की इच्‍छा है ।

साथ में मैं भी बताऊंगा कि रफ़ी साहब ने मेरी जिंदगी पर क्‍या असर डाला है ।

मैं फिर से स्‍पष्‍ट कर दूं कि केवल गाने मत बताईयेगा बल्कि ये भी बताईये कि जिंदगी के किस मोड़ पर इन गानों ने आपके मन को छुआ । इन गानों का आपकी जिंदगी में क्‍या महत्‍त्‍व है वग़ैरह । ताकि हम गानों से रची एक पूरी दुनिया से वाकिफ़ हो सकें और जान सकें कि कुछ कालजयी कलाकार और कुछ कालजयी गीत केवल रिकॉर्ड पर नहीं होते, वो तो हर सरहद को पार करते हुए हमारे मन की कंदराओं में समा जाते हैं । हमारे लहू में घुल जाते हैं । हमारी ज़ुबां पर चढ़ जाते हैं और हमारे मस्तिष्‍क पर छप जाते हैं । कैसे और
कब । क्‍या पता ।

फिलहाल तो रफ़ी साहब पर तैयार की गयी कुछ पुरानी पोस्‍टों का ब्‍यौरा नीचे दिया गया
है ।

रफी साहब को गाते हुए देखने के लिए
यहां पर क्लिक करें

रफी साहब के
इस गीत को पूरे हुए साठ साल



मुझे आपकी टिप्‍पणियों का इंतज़ार है ।



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कल मो. रफ़ी की पुण्‍यतिथि है, बताईये रफ़ी आपको क्‍यों प्रिय हैं


कल मो. रफी की पुण्‍यतिथि है ।
जब शोर और संगीत का फ़र्क़ मिटता जा रहा है, तो इस दिन हम अपने मेहबूब फ़नकार को सलाम करेंगे और ज़माने के चलन पर सोग़ मनायेंगे ।

31 जुलाई का दिन दो हस्तियों के लिए याद किया जाता है । एक मो0 रफी और दूसरे प्रेमचंद ।

दोनों को हमने याद भी रखा पर प्रकारांतर से भुला भी तो दिया है ।

मो0 रफी पर कल ‘रेडियोवाणी’ पर एक विशेष आयोजन किया जायेगा ।
‘ज्ञान’ जी क्‍या मैं आपसे प्रेमचंद पर लिखने का निवेदन कर सकता हूं ।

लेकिन फिलहाल कल तक आपको बताने हैं रफ़ी के अपने पसंदीदा गीत । नहीं
समीर भाई, ये गुज़ारिश मैं अपने नए पॉडकास्‍ट के लिए नहीं कर रहा । थोड़े दिनों के लिए पॉडकास्‍ट को विराम दिया जा रहा है । कुछ हफ्ते रूकियेगा पॉडकास्‍ट के लिए ।

दरअसल जब हमारा सामूहिक-ब्‍लॉग रेडियोनामा शुरू हो जायेगा तब इस तरह की चर्चाएं उस ब्‍लॉग पर ही की जायेंगी । लेकिन रफ़ी साहब के बहाने हम ये जानना चाहते हैं कि एक कालजयी कलाकार हमारी जिंदगी में किस क़दर दख़ल रखता है । हमारी जिंदगी के वो कौन से लम्‍हे होते हैं जो इनकी वजह से अनमोल बन जाते हैं ।

रफ़ी साहब ने आपकी जिंदगी के किन दिनों को यादगार बनाया है यही जानना चाहता हूं मैं । आपकी बातों को संपादित करके एक पूरी पोस्‍ट में प्रस्‍तुत करने की इच्‍छा है ।

साथ में मैं भी बताऊंगा कि रफ़ी साहब ने मेरी जिंदगी पर क्‍या असर डाला है ।

मैं फिर से स्‍पष्‍ट कर दूं कि केवल गाने मत बताईयेगा बल्कि ये भी बताईये कि जिंदगी के किस मोड़ पर इन गानों ने आपके मन को छुआ । इन गानों का आपकी जिंदगी में क्‍या महत्‍त्‍व है वग़ैरह । ताकि हम गानों से रची एक पूरी दुनिया से वाकिफ़ हो सकें और जान सकें कि कुछ कालजयी कलाकार और कुछ कालजयी गीत केवल रिकॉर्ड पर नहीं होते, वो तो हर सरहद को पार करते हुए हमारे मन की कंदराओं में समा जाते हैं । हमारे लहू में घुल जाते हैं । हमारी ज़ुबां पर चढ़ जाते हैं और हमारे मस्तिष्‍क पर छप जाते हैं । कैसे और
कब । क्‍या पता ।

फिलहाल तो रफ़ी साहब पर तैयार की गयी कुछ पुरानी पोस्‍टों का ब्‍यौरा नीचे दिया गया
है ।

रफी साहब को गाते हुए देखने के लिए
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परिचय

संगीत का ब्‍लॉग । मुख्‍य-रूप से हिंदी-संगीत । संगीत दिलों को जोड़ता है । संगीत की कोई सरहद नहीं होती ।

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