कैसे कैसे रंग दिखाए कारी रतिया-जगजीत सिंह की आवाज़ फिल्म कालका
रेडियोवाणी पर कुछ दिन पहले फिल्म कालका का वो गीत आपको सुनवाया था जो मैं बहुत दिनों से खोज रहा था । बिदेसिया । जब कालका का रिकॉर्ड मिल ही गया तो उसके साथ आए इस फिल्म के सारे नग़्मे । उनमें से एक ये भी है जिसे आज आप तक पहुंचा रहा हूं । ये गीत जगजीत सिंह अपने लगभग सभी कंसर्टों में गाते हैं ।
चूंकि मैंने फिल्म कालका नहीं देखी इसलिए पता नहीं है कि इस गीत की
फिल्म में क्या जगह है । पर जगजीत सिंह के संगीतबद्ध किये इन गानों का क़द्रदान जरूर रहा हूं । जगजीत की गाढ़ी और खरजदार आवाज़ में शास्त्रीय-गीत बहुत जंचते हैं । इसलिए जब कंसर्टों में वो अपनी मनचाही रचनाएं गाते हैं तो आनंद की अनूठी अनुभूति होती है । मुझे जगजीत से हमेशा एक शिकायत रही है और वो ये कि अपनी ग़ज़लों को कम्पोज़ करने में जगजीत पिछले बीस सालों से बहुत ज्यादा टाइप्ड हो गये हैं । धुनों की कोई बड़ी क्रांति उन्होंने नहीं दिखाई । अपने ही बनाए एक पक्के रास्ते पर टहलते रहे और इस तरह हम जैसे चाहने वालों का दिल तोड़ दिया है जगजीत सिंह ने । बहरहाल कालका फिल्म का ये गीत सुनिए । इसे किन्हीं सत्यनारायण जी ने लिखा है ।
इस गाने को सुनने का एक और जुगाड़ ये रहा । अगर आपको अपने ब्राउज़र पर दिक्कत आए तो जांचें कि आपके पास फ्लैश प्लेयर है या नहीं ।
कैसे कैसे रंग दिखाए कारी रतिया
हमको ही हमसे चुराए कारी रतिया ।।
माया की नगरिया में सोने की बजरिया
नाच नाच हारी रामा बावरी गुजरिया
रह रह नाच नचावै कारी रतिया ।।
जेह दिन आइहैं पिया के संदेसवा
उड़ जईहैं सुगना, छूट जइहैं देसवा
रोए रोए हमको बताए कारी रतिया ।।
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