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Saturday, May 24, 2008

सो जा राजकुमारी सो जा: कुंदनलाल सहगल और लता की अलग अलग आवाज़ें ।

रेडियोवाणी पर आज हम कुंदनलाल सहगल का गाया एक बेमिसाल गीत लेकर हाजिर हुए हैं । जाने क्‍यों सहगल का ये गीत बहुत दिनों से मन में गूंज रहा था । मुझे लोरियों से ख़ास प्‍यार रहा है । फिल्‍म संसार की कुछ लोरियां मेरे दिल के काफी क़रीब हैं । जिनकी चर्चा फिर कभी की जाएगी ।

फिलहाल तो इस लोरी की बात की जाए । सन 1940 में एक फिल्‍म आई थी 'जिंदगी' । न्‍यू थियेटर्स कलकत्‍ता की इस फिल्‍म के कलाकार थे आशालता, ब्रिकम कपूर, जमुना, निम्‍मो और above all कुंदनलाल सहगल । प्रमथेश चंद्र बरूआ इस फिल्‍म के निर्देशक थे । इस गाने को केदार शर्मा ने लिखा और पंकज मलिक ने इसकी धुन बनाई ।

इस गाने में एक दिव्‍य-सांगीतिक-सौंदर्य है । लोरियां ऐसी ही होनी चाहिए, ज़रा सोचिए कि आज से अड़सठ साल पहले बना ये गीत अब तक हमारे बीच है और लोकप्रिय है । ये कितनी बड़ी बात है । इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि आज के ज़माने का कोई गीत क्‍या अड़सठ साल बाद उतने ही चाव से सुना जा सकेगा । मुझे तो शक है ।

तो आईये ढलती शाम के इन सायों में जीवन के तनावों और दबावों से छुटकारा पाने के लिए खुद को इस गाने की तरंगों पर आज़ाद छोड़ दें । और एक दिव्‍य सुकून का अहसास करें । तीन मिनिट सात सेकेन्‍ड का एक स्‍वर्गिक अनुभव

सो जा राजकुमारी सो जा ।

सो जा मैं बलिहारी सो जा ।।

सो जा मीठे सपने आएं,

सपनों में पी दरस दिखाएं

उड़कर रूपनगर में जायें ।

रूपनगर की सखियां आयें

राजाजी माला पहनायें

चूमे मांग तिहारी सो जा ।

सो जा राजकुमारी सो जा ।

लता मंगेशकर ने इस गाने को अपनी श्रृंखला श्रद्धांजली में शामिल किया था और गाया भी था । यूट्यूब पर मुझे इसका ऑडियो मिला है । इसे भी सुनिए

 

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सो जा राजकुमारी सो जा: कुंदनलाल सहगल और लता की अलग अलग आवाज़ें ।

रेडियोवाणी पर आज हम कुंदनलाल सहगल का गाया एक बेमिसाल गीत लेकर हाजिर हुए हैं । जाने क्‍यों सहगल का ये गीत बहुत दिनों से मन में गूंज रहा था । मुझे लोरियों से ख़ास प्‍यार रहा है । फिल्‍म संसार की कुछ लोरियां मेरे दिल के काफी क़रीब हैं । जिनकी चर्चा फिर कभी की जाएगी ।

फिलहाल तो इस लोरी की बात की जाए । सन 1940 में एक फिल्‍म आई थी 'जिंदगी' । न्‍यू थियेटर्स कलकत्‍ता की इस फिल्‍म के कलाकार थे आशालता, ब्रिकम कपूर, जमुना, निम्‍मो और above all कुंदनलाल सहगल । प्रमथेश चंद्र बरूआ इस फिल्‍म के निर्देशक थे । इस गाने को केदार शर्मा ने लिखा और पंकज मलिक ने इसकी धुन बनाई ।

इस गाने में एक दिव्‍य-सांगीतिक-सौंदर्य है । लोरियां ऐसी ही होनी चाहिए, ज़रा सोचिए कि आज से अड़सठ साल पहले बना ये गीत अब तक हमारे बीच है और लोकप्रिय है । ये कितनी बड़ी बात है । इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि आज के ज़माने का कोई गीत क्‍या अड़सठ साल बाद उतने ही चाव से सुना जा सकेगा । मुझे तो शक है ।

तो आईये ढलती शाम के इन सायों में जीवन के तनावों और दबावों से छुटकारा पाने के लिए खुद को इस गाने की तरंगों पर आज़ाद छोड़ दें । और एक दिव्‍य सुकून का अहसास करें । तीन मिनिट सात सेकेन्‍ड का एक स्‍वर्गिक अनुभव

सो जा राजकुमारी सो जा ।

सो जा मैं बलिहारी सो जा ।।

सो जा मीठे सपने आएं,

सपनों में पी दरस दिखाएं

उड़कर रूपनगर में जायें ।

रूपनगर की सखियां आयें

राजाजी माला पहनायें

चूमे मांग तिहारी सो जा ।

सो जा राजकुमारी सो जा ।

लता मंगेशकर ने इस गाने को अपनी श्रृंखला श्रद्धांजली में शामिल किया था और गाया भी था । यूट्यूब पर मुझे इसका ऑडियो मिला है । इसे भी सुनिए

 

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परिचय

संगीत का ब्‍लॉग । मुख्‍य-रूप से हिंदी-संगीत । संगीत दिलों को जोड़ता है । संगीत की कोई सरहद नहीं होती ।

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