Showing posts with label pandit channulal mishra. Show all posts
Showing posts with label pandit channulal mishra. Show all posts

Wednesday, March 11, 2009

खेलें मसाने में होली दिगंबर: पंडित छन्‍नूलाल मिश्रा का दिव्‍य-स्‍वर

holi

होली मुझे बेहद तरंगित और ललित पर्व लगता है । मुझे लगता है कि आधुनिक-जीवन के तनावों और दबावों से निपटने के लिए होली एक 'स्‍ट्रेस-बस्‍‍टर' की तरह है । जिसमें हम अपने भीतर जमा हो चुके 'संत्रास' को मौज-मस्‍ती के माध्‍यम से बाहर निकालकर बहुत हल्‍के हो जाते हैं । उम्‍मीद है कि आपकी ये होली ऐसी ही होगी ।

होली के इस मौक़े पर पंडित छन्‍नूलाल मिश्रा को सुनना अपने आप में एक  channulal Mishraदिव्‍य-अनुभव होता है । हालांकि आपको लग सकता है कि होली के इस शुभ मौक़े पर ये होली थोड़ी-सी अजीब और थोड़ी-सी भयानक है, जो भी है ये अपने आप में एक अद्भुत-होली है ।

कुल मिलाकर ये छह मिनिट अड़तालीस सेकेन्‍ड की रचना है । जो आपको एक पूरे जीवन-काल का आनंद देगी ।

बतलाईये आपकी होली कैसी है और छन्‍नूलाल जी को सुनना कैसा अनुभव रहा आपके लिए ।


 
खेलैं मसाने में होरी दिगंबर खेले मसाने में होरी ।
भूत पिसाच बटोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी ।।
लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के
चिता-भस्‍म भर झोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी ।।
गोपन-गोपी श्‍याम न राधा, ना कोई रोक ना कौनऊ बाधा
ना साजन ना गोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी ।।
नाचत गावत डमरूधारी, छोड़ै सर्प-गरल पिचकारी
पीतैं प्रेत-धकोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी ।।
भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज कै गोरी
धन-धन नाथ अघोरी दिगंबर खेलैं मसाने में होरी ।।

Read more...

अब sms के ज़रिए पाईये ताज़ा पोस्‍ट की जानकारी

खेलें मसाने में होली दिगंबर: पंडित छन्‍नूलाल मिश्रा का दिव्‍य-स्‍वर

holi

होली मुझे बेहद तरंगित और ललित पर्व लगता है । मुझे लगता है कि आधुनिक-जीवन के तनावों और दबावों से निपटने के लिए होली एक 'स्‍ट्रेस-बस्‍‍टर' की तरह है । जिसमें हम अपने भीतर जमा हो चुके 'संत्रास' को मौज-मस्‍ती के माध्‍यम से बाहर निकालकर बहुत हल्‍के हो जाते हैं । उम्‍मीद है कि आपकी ये होली ऐसी ही होगी ।

होली के इस मौक़े पर पंडित छन्‍नूलाल मिश्रा को सुनना अपने आप में एक  channulal Mishraदिव्‍य-अनुभव होता है । हालांकि आपको लग सकता है कि होली के इस शुभ मौक़े पर ये होली थोड़ी-सी अजीब और थोड़ी-सी भयानक है, जो भी है ये अपने आप में एक अद्भुत-होली है ।

कुल मिलाकर ये छह मिनिट अड़तालीस सेकेन्‍ड की रचना है । जो आपको एक पूरे जीवन-काल का आनंद देगी ।

बतलाईये आपकी होली कैसी है और छन्‍नूलाल जी को सुनना कैसा अनुभव रहा आपके लिए ।


 
खेलैं मसाने में होरी दिगंबर खेले मसाने में होरी ।
भूत पिसाच बटोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी ।।
लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के
चिता-भस्‍म भर झोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी ।।
गोपन-गोपी श्‍याम न राधा, ना कोई रोक ना कौनऊ बाधा
ना साजन ना गोरी, दिगंबर खेले मसाने में होरी ।।
नाचत गावत डमरूधारी, छोड़ै सर्प-गरल पिचकारी
पीतैं प्रेत-धकोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी ।।
भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज कै गोरी
धन-धन नाथ अघोरी दिगंबर खेलैं मसाने में होरी ।।

Read more...

अब sms के ज़रिए पाईये ताज़ा पोस्‍ट की जानकारी

परिचय

संगीत का ब्‍लॉग । मुख्‍य-रूप से हिंदी-संगीत । संगीत दिलों को जोड़ता है । संगीत की कोई सरहद नहीं होती ।

Blog Archive

ब्‍लॉगवाणी

www.blogvani.com

  © Blogger templates Psi by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP